News : ममता की अन्ना से करीबी पर मौलाना ने किया खबरदार
See News -
दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के साथ होने वाली ममता बनर्जी की संयुक्त रैली से एक दिन पहले कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही ईमाम ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी को हजारे के साथ दोस्ती तोड़ने की हिदायत दी है. शाही इमाम मौलाना नूर-उर-रहमान बरकती ने अन्ना हजारे की धर्मनिर्पेक्षता पर सवाल उठाते हुए ममता को उनके साथ दोस्ती रखने पर खबरदार किया है.
आज तक के सहयोगी चैनल हेडलाइन्स टुडे के साथ बात करते हुए नूर-उर-रहमान बरकती ने कहा कि अन्ना हजारे आरएसएस की कठपुतली हैं और ममता बनर्जी का उनके साथ संबंध उनके अभियान को नुकसान ही पहुंचाएगा. इससे निश्चित रूप से तृणमूल को मिल रहे मुस्लिमों के समर्थन पर भी असर पड़ेगा.
ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री प्रत्याशी के रूप में समर्थन देने वाले बरकती ने कहा है, ‘उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए कि उनके लिए अन्ना हजारे के साथ मंच साझा करना उचित रहेगा या नहीं. उन्हें उन संकेतों की परवाह करनी होगी जो इसके जरिए राज्य के मुस्लिमों तक पहुंचेगी.’
अन्ना हजारे के साथ मंच साझा करने से इनकार करने वाले बरकती ने कहा कि शाही ईमाम सय्यद अहमद बुखारी ने भी 12 मार्च को दिल्ली में अन्ना के साथ मंच साझा करने से मना कर दिया है. बरकती ने कहा, अन्ना के अहम सहयोगी जैसे किरण बेदी और वी.के. सिंह ने खुले तौर पर बीजेपी का समर्थन किया है. वी.के. सिंह तो बकायदा बीजेपी में शामिल भी हो गए हैं. यही नहीं बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर अन्ना की चुप्पी उन्हें संदेह में डालती है.
बरकती ने कहा कि बंगाल के मुसलमान अन्ना के साथ ममता बनर्जी के गठजोड़ से नाराज हैं. यहां तक की उत्तर प्रदेश में तृणमूल के पूर्व पार्टी प्रभारी आसिफ खान को भी लगता है कि अन्ना हजारे का अचानक ममता बनर्जी के समर्थन में आना भी चुनाव के बाद उन्हें बीजेपी से हाथ मिलाने के लिए मनाने का एक छुपा हुआ प्लान हो सकता है.
बंगाल में करीब 28 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं और 2009 में हुए पिछले आम चुनाव से ज्यादातर मुस्लिम ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को वोट देते आ रहे हैं. ममता बनर्जी ने भी बंगाल में सरकार बनने के बाद मुस्लिम वोटों को अपनी तरफ ही रखने के लिए मुसलमानों के लिए कई कदम उठाए हैं.
बरकती ने हेडलाइन्स टुडे से बात करते हुए कहा कि ममता बनर्जी अन्ना हजारे को मुझसे ज्यादा जानती हैं और उन्हें सोचना चाहिए कि अन्ना हजारे से हाथ मिलाना ठीक रहेगा या नहीं, क्या ये देश के मुसलमानों के लिए अच्छा होगा या नहीं. उन्होंने कहा, मैंने ममता बनर्जी तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है और एक बार फिर आपके चैनल के माध्यम से ममता से कहना चाहता हूं कि अन्ना हजारे के साथ मंच साझा करना ठीक नहीं रहेगा
News Source / Sabhaar : aajtak.intoday.in / http://ift.tt/1m4cAe5
See News -
दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के साथ होने वाली ममता बनर्जी की संयुक्त रैली से एक दिन पहले कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही ईमाम ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी को हजारे के साथ दोस्ती तोड़ने की हिदायत दी है. शाही इमाम मौलाना नूर-उर-रहमान बरकती ने अन्ना हजारे की धर्मनिर्पेक्षता पर सवाल उठाते हुए ममता को उनके साथ दोस्ती रखने पर खबरदार किया है.
आज तक के सहयोगी चैनल हेडलाइन्स टुडे के साथ बात करते हुए नूर-उर-रहमान बरकती ने कहा कि अन्ना हजारे आरएसएस की कठपुतली हैं और ममता बनर्जी का उनके साथ संबंध उनके अभियान को नुकसान ही पहुंचाएगा. इससे निश्चित रूप से तृणमूल को मिल रहे मुस्लिमों के समर्थन पर भी असर पड़ेगा.
ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री प्रत्याशी के रूप में समर्थन देने वाले बरकती ने कहा है, ‘उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए कि उनके लिए अन्ना हजारे के साथ मंच साझा करना उचित रहेगा या नहीं. उन्हें उन संकेतों की परवाह करनी होगी जो इसके जरिए राज्य के मुस्लिमों तक पहुंचेगी.’
अन्ना हजारे के साथ मंच साझा करने से इनकार करने वाले बरकती ने कहा कि शाही ईमाम सय्यद अहमद बुखारी ने भी 12 मार्च को दिल्ली में अन्ना के साथ मंच साझा करने से मना कर दिया है. बरकती ने कहा, अन्ना के अहम सहयोगी जैसे किरण बेदी और वी.के. सिंह ने खुले तौर पर बीजेपी का समर्थन किया है. वी.के. सिंह तो बकायदा बीजेपी में शामिल भी हो गए हैं. यही नहीं बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर अन्ना की चुप्पी उन्हें संदेह में डालती है.
बरकती ने कहा कि बंगाल के मुसलमान अन्ना के साथ ममता बनर्जी के गठजोड़ से नाराज हैं. यहां तक की उत्तर प्रदेश में तृणमूल के पूर्व पार्टी प्रभारी आसिफ खान को भी लगता है कि अन्ना हजारे का अचानक ममता बनर्जी के समर्थन में आना भी चुनाव के बाद उन्हें बीजेपी से हाथ मिलाने के लिए मनाने का एक छुपा हुआ प्लान हो सकता है.
बंगाल में करीब 28 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं और 2009 में हुए पिछले आम चुनाव से ज्यादातर मुस्लिम ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को वोट देते आ रहे हैं. ममता बनर्जी ने भी बंगाल में सरकार बनने के बाद मुस्लिम वोटों को अपनी तरफ ही रखने के लिए मुसलमानों के लिए कई कदम उठाए हैं.
बरकती ने हेडलाइन्स टुडे से बात करते हुए कहा कि ममता बनर्जी अन्ना हजारे को मुझसे ज्यादा जानती हैं और उन्हें सोचना चाहिए कि अन्ना हजारे से हाथ मिलाना ठीक रहेगा या नहीं, क्या ये देश के मुसलमानों के लिए अच्छा होगा या नहीं. उन्होंने कहा, मैंने ममता बनर्जी तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है और एक बार फिर आपके चैनल के माध्यम से ममता से कहना चाहता हूं कि अन्ना हजारे के साथ मंच साझा करना ठीक नहीं रहेगा
News Source / Sabhaar : aajtak.intoday.in / http://ift.tt/1m4cAe5
10:51
Unknown
Posted in:
0 comments:
Post a Comment